गुरुवार के भस्म आरती दर्शन
बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खोलने के पश्चात भगवान महाकाल को गर्म जल से स्नान कराया गया। इसके बाद पण्डे-पुजारियों ने दूध, दही, घी, शहद, फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा महाकाल का अभिषेक पूजन किया। हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान के मस्तक भगवान महाकाल को त्रिपुण्ड, भांग, चन्दन अर्पित कर राजा स्वरूप श्रृंगार किया।

भस्म अर्पित करने के पश्चात भगवान महाकाल को ड्रायफ्रूट के साथ भोग अर्पित कर कर्पूर आरती की गई। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला के साथ सुगन्धित पुष्प से बनी फूलों की माला अर्पित की गई। भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई।

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भगवान को पंचामृत अर्पित करने का धार्मिक महत्व
पंचामृत का भगवान को अर्पण करने का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। पंचामृत पाँच प्रमुख तत्वों से बना होता है: दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर। इन पाँचों को मिलाकर जो मिश्रण तैयार होता है, उसे पंचामृत कहते हैं, और इसे भगवान को अर्पण करना शुभ माना जाता है।
1. दूध: पवित्रता और शांति का प्रतीक है।
2. दही: संपन्नता और समृद्धि का प्रतीक है।
3. घी: शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है।
4. शहद: मधुरता और प्रेम का प्रतीक है।
5. शक्कर: मिठास और प्रसन्नता का प्रतीक है।
पंचामृत का भगवान को अर्पण करना उनके प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण व्यक्त करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचामृत का सेवन करने से शरीर और मन की शुद्धि होती है, साथ ही यह भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने का एक माध्यम भी है।
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बुधवार भस्मारती दर्शन
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खोले गए। भगवान महाकाल का गर्म जल से अभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद, शक़्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन के बाद भांग, चन्दन, रजत त्रिपुण्ड और त्रिनेत्र अर्पित कर राजा स्वरूप श्रृंगार किया गया।
मंत्रोचार के साथ भगवान की कपूर आरती कर भोग लगाया गया। भस्म अर्पित कर सूखे मेवे त्रिशूल और चंद्र के साथ भगवान महाकाल ने त्रिनेत्र धारण किया। सिर पर शेषनाग का रजत मुकुट धारण कर रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। सुगन्धित पुष्प से बनी फूलों की माला भगवान ने धारण की।
नवीन वस्त्र अर्पित कर फल और मिष्ठान का भोग लगाया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है की भस्म अर्पित करने के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में दर्शन देते है।

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महाकाल को कैसे प्रसन्न करें?
भगवान शिव को प्रसन्न करना बहुत सरल माना जाता है, क्योंकि उन्हें “आशुतोष” कहा जाता है, यानी वे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं। यहाँ कुछ आसान और प्रभावी उपाय हैं जिनसे आप भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते हैं:
1. भोलेनाथ का जलाभिषेक करें
शिवलिंग पर जल अर्पित करना सबसे सरल और प्रभावी उपाय है। माना जाता है कि गंगा जल, शुद्ध जल, या दूध से अभिषेक करने पर भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। साथ ही, बेलपत्र, धतूरा, और भांग भी अर्पित कर सकते हैं।
2. ॐ नमः शिवाय का जाप करें
भगवान शिव का सबसे प्रिय मंत्र “ॐ नमः शिवाय” है। इसका नियमित जाप करने से मन की शांति मिलती है और शिव की कृपा प्राप्त होती है। इस मंत्र का जाप विशेष रूप से सोमवार और महाशिवरात्रि पर करना उत्तम माना जाता है।
3. रुद्राभिषेक करें
रुद्राभिषेक पूजा में विशेष मंत्रों के साथ शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। इसमें रुद्र मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, और पंचामृत चढ़ाया जाता है। यह पूजा अत्यंत फलदायक मानी जाती है।
4. सादा जीवन और सच्चा आचरण अपनाएँ
भगवान शिव सादगी और सत्य के प्रतीक हैं। उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अपने जीवन में सत्य, अहिंसा, और सच्चाई का पालन करना चाहिए। किसी भी प्रकार का पाखंड या असत्य शिव को प्रिय नहीं है।
5. महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें
यदि आप कठिनाइयों से घिरे हैं या रोग और दुःख से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत लाभकारी है। यह मंत्र भगवान शिव को प्रसन्न करने के साथ-साथ आरोग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद भी देता है।
मंत्र:
ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
6. सावन और सोमवार का व्रत रखें
सावन मास और सोमवार भगवान शिव को विशेष प्रिय हैं। इन दिनों में व्रत रखने से और शिव जी की उपासना करने से विशेष फल मिलता है। सावन के महीने में रोज शिवलिंग का अभिषेक करें और सोमवार के दिन व्रत रखें।
7. शिव कथा और शिव पुराण का पाठ
भगवान शिव की महिमा का गुणगान सुनना और उनके जीवन से जुड़ी कथाएँ पढ़ना या सुनना भी भगवान शिव की कृपा पाने का एक उत्तम उपाय है। शिव पुराण का पाठ विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है।
8. ध्यान और साधना करें
भगवान शिव को ध्यान और साधना प्रिय है। उनकी उपासना के दौरान ध्यान करें और मन को एकाग्र करके शिव के स्वरूप का चिंतन करें। यह मानसिक शांति के साथ-साथ शिव की कृपा भी प्रदान करता है।
इन सरल उपायों का पालन करके आप भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं।
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मंगलवार के भस्म आरती दर्शन
भगवान महाकाल का सिंदूर, चंद्र, आभूषण अर्पित कर दिव्य श्रृंगार
बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खोलने के पश्चात भगवान महाकाल को जल से स्नान कराया गया। इसके बाद पण्डे पुजारियों ने दूध, दही, घी, शहद, फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा महाकाल का अभिषेक पूजन किया। भगवान महाकाल का सिंदूर, चंद्र, आभूषण अर्पित कर दिव्य श्रृंगार किया गया।


भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल की कपूर आरती कर भोग लगाया गया। मंत्रोच्चर के साथ भगवान को भांग, चन्दन, सिंदूर और आभूषण अर्पित किए गए। मस्तक पर चन्दन का तिलक और शेषनाग का रजत मुकुट धारण कर रजत की मुंडमाला और रजत जड़ी रुद्राक्ष की माला के साथ सुगन्धित पुष्प से बनी फूलों की माला अर्पित की गई। फल और मिष्ठान का भोग लगाया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। महानिर्वाणी अखाड़े की और से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई।
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महादेव के चरणों में
महाकाल के दर पे सजदा करें,
हर सांस में शिव का ही नाम भरें।
त्रिनेत्रधारी, नीलकंठ वो,
जग के हर कष्ट का समाधान करें।
गंगा की धार, जटाओं में समेटे,
कंठ में विष, फिर भी शांत स्वरूप।
शिव ही है संहारक, शिव ही सृजन,
शक्ति का अवतार, परम सखा और गुरु।
डमरू की ध्वनि में है सृष्टि का राग,
भस्म रमाए, अधरों पर है मुस्कान।
आशुतोष हैं, सदा भक्तों पर कृपा करें,
उनकी मूरत से मन को मिले शांति महान।
हे कैलाशपति, हमें भी वर दो,
तुम्हारी राह पर हम सदा चलें।
सत्य, तप, और धर्म का पालन करें,
महादेव के चरणों में जीवन निहाल बनें।
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4-11-24 सोमवार के भस्म आरती दर्शन
भगवान महाकाल को त्रिपुण्ड, त्रिनेत्र, भांग, चन्दन अर्पित कर राजा स्वरूप श्रृंगार
बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खोलने के पश्चात भगवान महाकाल को जल से स्नान कराया गया। इसके बाद पण्डे-पुजारियों ने दूध,दही,घी,शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा महाकाल का अभिषेक पूजन किया। हरिओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल को त्रिपुण्ड, त्रिनेत्र, भांग और चन्दन अर्पित कर राजा स्वरूप श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पित करने के पश्चात, भगवान महाकाल को ड्रायफ्रूट के साथ भोग अर्पित कर कर्पूर आरती की गई। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला के साथ सुगन्धित पुष्प से बनी फूलों की माला अर्पित की। फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।
भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। महा निर्वाणी अखाड़े की और से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई।

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