धनतेरस 2025 (Dhanteras 2025): तिथि, महत्व, खरीदारी का शुभ समय और पूजन विधि
धनतेरस 2025: तिथि, महत्व, खरीदारी का शुभ समय और पूजन विधि
धनतेरस दीपावली पर्व का पहला दिन होता है, जिसे धन त्रयोदशी भी कहते हैं। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में धनतेरस का पर्व 17 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है। साथ ही लोग सोना, चांदी, बर्तन और वाहन खरीदते हैं।
धनतेरस का महत्व
धनतेरस का पर्व सुख, समृद्धि और आरोग्यता का प्रतीक है। इस दिन की गई खरीदारी को शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। धनतेरस पर मां लक्ष्मी का स्वागत कर समृद्ध जीवन की कामना की जाती है।
धनतेरस 2025 (Dhanteras 2025) तिथि
- तिथि — 17 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार)
शुभ मुहूर्त
- खरीदारी का समय — प्रातः से लेकर देर रात तक शुभ रहता है।
- लक्ष्मी पूजन मुहूर्त — संध्या समय प्रदोष काल में।
पूजन विधि
- संध्या को घर की सफाई कर दीप जलाएं।
- भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- रोली, अक्षत, फूल और मिठाई से पूजा करें।
- धातु के बर्तन में जल भरकर कलश की स्थापना करें।
- 13 दीप जलाकर दरवाजे और पूजा स्थल पर रखें।
धनतेरस की कथा
मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। तभी से यह दिन स्वास्थ्य, आयु और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
क्या करें इस दिन?
- नया बर्तन, सोना-चांदी या इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदें।
- दीप जलाकर मां लक्ष्मी का आवाहन करें।
- जरूरतमंदों को दान और भोजन दें।
विशेष मान्यता
ऐसा कहा जाता है कि धनतेरस पर की गई खरीदारी जीवन में खुशहाली और सौभाग्य लाती है। इस दिन गरीबों की मदद करने से पुण्य लाभ मिलता है।
उपसंहार
धनतेरस खुशहाली और समृद्धि का पर्व है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जीवन में स्वास्थ्य और धन दोनों का संतुलन जरूरी है। मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का आशीर्वाद जीवन को सुखमय बनाता है।
FAQ – धनतेरस 2025 (Dhanteras 2025)
Q1: धनतेरस 2025 (Dhanteras 2025) में कब है?
A1: धनतेरस 2025 में 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
Q2: धनतेरस क्यों मनाया जाता है?
A2: धनतेरस धन की देवी मां लक्ष्मी और धन्वंतरि भगवान की पूजा के लिए मनाया जाता है। इस दिन खरीदारी और नए वस्त्र, सोना-चांदी व बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।
Q3: धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ होता है?
A3: इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, झाड़ू, और गृह उपयोग की चीजें खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Q4: क्या धनतेरस पर लक्ष्मी पूजन किया जाता है?
A4: जी हाँ, धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है।
Q5: धनतेरस पर दीपक जलाने का क्या महत्व है?
A5: इस दिन घर के मुख्य द्वार और हर कोने पर दीपक जलाया जाता है ताकि दरिद्रता दूर हो और सुख-समृद्धि का वास हो।
Q6: क्या धनतेरस पर यम दीपक भी जलाया जाता है?
A6: हाँ, संध्या समय यमराज को प्रसन्न करने के लिए यम दीपक जलाने की परंपरा है जिससे अकाल मृत्यु का दोष नहीं लगता।
Q7: धनतेरस पर कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए?
A7: धनतेरस पर ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायक माना जाता है।
Q8: क्या धनतेरस को धन्वंतरि जयंती भी कहा जाता है?
A8: जी हाँ, इस दिन भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य दिवस भी मनाया जाता है, जो आयुर्वेद के जनक माने जाते हैं।
Q9: क्या धनतेरस पर कर्ज लेना या देना उचित है?
A9: नहीं, धनतेरस के दिन कर्ज लेना या देना अशुभ माना जाता है।
Q10: धनतेरस से दीपावली का क्या संबंध है?
A10: धनतेरस दीपावली पर्व की शुरुआत मानी जाती है और यह त्यौहार पांच दिनों तक चलता है, जिसमें सबसे पहले धनतेरस आता है।
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नरक चतुर्दशी 2025 (Narak Chaturdashi 2025): तिथि, महत्व, पूजा विधि और नरकासुर वध कथा
नरक चतुर्दशी 2025: तिथि, महत्व, पूजा विधि और नरकासुर वध कथा
नरक चतुर्दशी को रूप चौदस, काली चौदस और छोटी दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। 2025 में नरक चतुर्दशी 18 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन सुबह स्नान और तिल दान का विशेष महत्व होता है और घर को दीपों से सजाया जाता है।
नरक चतुर्दशी का महत्व
इस दिन प्रातःकाल स्नान करके तिल का दान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और नरक का भय समाप्त होता है। यह दिन रूप और सौंदर्य बढ़ाने के लिए भी माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन नरकासुर का वध कर धरती को भयमुक्त किया था।
नरक चतुर्दशी 2025 (Narak Chaturdashi 2025) तिथि
- तिथि — 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार)
पूजा विधि
- सूर्योदय से पूर्व उबटन और स्नान करें।
- स्नान के बाद तिल दान करें और दीप जलाएं।
- घर में दीप जलाकर पवित्रता बनाए रखें।
- संध्या को भगवान श्रीकृष्ण और मां काली का पूजन करें।
नरकासुर वध कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, नरकासुर नामक राक्षस ने देवताओं और ऋषियों को परेशान किया और 16,100 कन्याओं का हरण किया। भगवान श्रीकृष्ण ने देवी सत्यभामा के साथ मिलकर नरकासुर का वध किया और सभी कन्याओं को मुक्त किया। तभी से इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।
क्या करें इस दिन?
- सूर्योदय से पूर्व स्नान कर तिल और जल का दान करें।
- घर में दीप जलाएं और सफाई करें।
- जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र दान करें।
- संध्या को दीप सजाएं और प्रार्थना करें।
विशेष मान्यता
ऐसा कहा जाता है कि नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करने और दान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप समाप्त हो जाते हैं और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
उपसंहार
नरक चतुर्दशी आत्मशुद्धि, सुंदरता और पाप मुक्ति का पर्व है। यह दिन बुराई से मुक्ति और सद्भावना की ओर कदम बढ़ाने का संदेश देता है।
FAQ – नरक चतुर्दशी 2025 (Narak Chaturdashi 2025)
Q1: नरक चतुर्दशी 2025 (Narak Chaturdashi 2025) में कब है?
A1: नरक चतुर्दशी 2025 में 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
Q2: नरक चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है?
A2: नरक चतुर्दशी बुराई और पाप से मुक्ति का पर्व है। इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर 16,100 कन्याओं को मुक्त किया था।
Q3: क्या नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है?
A3: जी हाँ, नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली के रूप में भी मनाया जाता है और यह दीपावली के एक दिन पहले आता है।
Q4: नरक चतुर्दशी के दिन क्या विशेष परंपरा है?
A4: इस दिन सुबह उबटन लगाकर स्नान करने और दीप जलाने की परंपरा है, जिसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है।
Q5: नरक चतुर्दशी पर क्या शुभ माना जाता है?
A5: इस दिन स्नान के बाद पूजा करके दीप जलाना, बुरे कर्मों का त्याग करना, और मिठाई व दान देना शुभ माना जाता है।
Q6: क्या नरक चतुर्दशी पर व्रत भी रखा जाता है?
A6: हाँ, कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और संध्या काल में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।
Q7: क्या नरक चतुर्दशी के दिन तेल स्नान का महत्व है?
A7: जी हाँ, इस दिन विशेष रूप से तेल उबटन और स्नान करने से रोग, दरिद्रता और पाप से मुक्ति मिलती है।
Q8: नरक चतुर्दशी का क्या आध्यात्मिक महत्व है?
A8: यह दिन जीवन से नकारात्मकता को हटाकर सकारात्मकता और शुभ ऊर्जा को आमंत्रित करने का अवसर है।
Q9: क्या नरक चतुर्दशी के दिन विशेष भोजन बनता है?
A9: हाँ, इस दिन घरों में हलवा, पूड़ी, चने, और पारंपरिक मिठाइयां बनाई जाती हैं।
Q10: नरक चतुर्दशी का संबंध किस देवता से है?
A10: नरक चतुर्दशी का सीधा संबंध भगवान कृष्ण और मां काली से है, जिन्होंने बुराई का नाश करके मानवता का कल्याण किया।







