दुर्गा सप्तशती का प्रतिदिन पाठ करने से शत्रु का नाश होता है और सिद्धियों की प्राप्ति होती है। दुर्गा सप्त सती के पाठ से मानसिक तनाव खत्म होता है और अध्यात्मिक उन्नति भी होती है। घर में उत्पन्न क्लेश नष्ट होता है और मन में अच्छे और सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं।
दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के लिए प्रातः काल जल्दी स्नान कर ले और माता की पूजा करें। पूजा में सम्मिलित सभी देवता का ध्यान करें, सबको तिलक लगाएं और स्वयं को भी तिलक लगा लें। जिस जगह पूजा या पाठ किया जाना है वहां की साफ-सफाई का ध्यान रखे और पूजा में पुष्प, ऋतु फल आदि शामिल करें।
माता के सामने तेल या घी का दीपक प्रज्ज्वलित करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अपनी भाषा में पढ़ करें एवं जोर से पाठ करें गुनगुन करते हुए या मन में पाठ न करें। पाठ करते समय लय में आराम से साफ उच्चारण के साथ पाठ करें अन्यथा जल्दबाजी में अर्थ का अनर्थ होने पर विपरीत परिणाम का भुगतान करना पड़ सकता है क्योंकि इससे माता क्रोधित हो जाती हैं।
इस पाठ को करने के लिए सबसे पहले नवार्ण मंत्र, कवच, इसके बाद कीलक और अर्गला स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इसके बाद ही दुर्गा सप्तशती के पाठ को आरंभ करना चाहिए। अगर आप इस प्रकार से पाठ करेंगे तो आपकी सारी मनोकामनाएं जल्दी पूरी होगी और साथ ही मां दुर्गा प्रसन्न होकर आप पर अपनी विशेष कृपा बरसाएगी।
पाठ पूर्ण होने के बाद हाथों में जल लेकर माता को अर्पित करें और सामने की तरफ छोड़ दे तथा भूमि को प्रणाम कर तिलक लगा लें।
क्षमा मंत्र के द्वारा माता से पूजा के दौरान हुई कमी पूर्ति के लिए क्षमा प्रार्थना करें और माता रानी से भूल चुक के लिए क्षमा मांगे।





