“त्रिभुवनवन्दिता क्षिप्रा” का अर्थ है — तीनों लोकों (स्वर्ग, मृत्युलोक और पाताल) द्वारा पूजित पवित्र क्षिप्रा नदी।
यह उपाधि स्कंद पुराण (Skanda Puran) के अवन्त्य खण्ड (Avantya Khanda) में क्षिप्रा नदी के आध्यात्मिक, मोक्षदायी और पापनाशक स्वरूप को दर्शाती है।
त्रिभुवनवन्दिता क्षिप्रा: क्षिप्रा नदी का दिव्य गौरव
उज्जैन की पावन धरती पर प्रवाहित क्षिप्रा नदी (Shipra River) केवल एक नदी नहीं, बल्कि सनातन आस्था, तप और मोक्ष की जीवंत धारा है। त्रिभुवनवन्दिता क्षिप्रा—यह पद स्वयं उसके अलौकिक महत्व को प्रकट करता है।
📖 त्रिभुवनवन्दिता क्षिप्रा का शाब्दिक अर्थ
- त्रिभुवन → तीन लोक (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल)
- वन्दिता → वंदनीय, पूज्य
- क्षिप्रा → उज्जैन की पवित्र नदी
👉 अर्थात, तीनों लोकों द्वारा पूजित पवित्र क्षिप्रा नदी।
🕉️ स्कंद पुराण में क्षिप्रा का उल्लेख
स्कंद पुराण (Skanda Puran) के अवन्त्य खण्ड (Avantya Khanda) में क्षिप्रा को—
- पुण्यदायिनी
- पापनाशिनी
- मोक्षदायिनी
- महाकालप्रिया
बताया गया है। यही कारण है कि क्षिप्रा तट पर किया गया स्नान, दान और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
🔱 महाकाल और क्षिप्रा का दिव्य संबंध
उज्जैन में विराजमान महाकाल (Mahakaleshwar Jyotirlinga) और क्षिप्रा नदी का संबंध अविभाज्य है।
मान्यता है कि:
- क्षिप्रा स्नान से शिव आराधना पूर्ण होती है
- भस्म आरती और महाकाल दर्शन का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है
- पितृ दोष, कालसर्प दोष और ग्रह बाधाओं की शांति होती है
🌼 त्रिभुवनवन्दिता क्षिप्रा से मिलने वाले आध्यात्मिक संदेश
1️⃣ पवित्रता का महत्व
क्षिप्रा सिखाती है कि शुद्धता—शरीर, मन और कर्म—तीनों में आवश्यक है।
2️⃣ निरंतर प्रवाह
नदी की तरह जीवन भी आगे बढ़ते रहने का संदेश देता है, बिना रुके।
3️⃣ समर्पण भाव
क्षिप्रा महाकाल को समर्पित है—यह हमें ईश्वर में पूर्ण विश्वास सिखाती है।
🌍 आधुनिक जीवन में क्षिप्रा का महत्व
आज के तनावपूर्ण जीवन में:
- क्षिप्रा तट पर ध्यान और स्नान मानसिक शांति देता है
- धार्मिक यात्रा आंतरिक संतुलन बनाती है
- कर्म और आस्था के बीच संतुलन सिखाती है
इसीलिए उज्जैन यात्रा केवल पर्यटन नहीं, आत्मिक उपचार है।
❓FAQs
Q1. त्रिभुवनवन्दिता क्षिप्रा किस ग्रंथ में आती है?
यह पद स्कंद पुराण के अवन्त्य खण्ड में मिलता है।
Q2. क्षिप्रा नदी को त्रिभुवनवन्दिता क्यों कहा गया?
क्योंकि यह तीनों लोकों में पूजित, पापनाशक और मोक्षदायिनी मानी जाती है।
Q3. क्षिप्रा स्नान का क्या महत्व है?
क्षिप्रा स्नान से पाप क्षय, ग्रह दोष शांति और आत्मिक शुद्धि होती है।
Q4. क्षिप्रा नदी उज्जैन के लिए क्यों विशेष है?
क्योंकि उज्जैन, महाकाल और क्षिप्रा—तीनों मिलकर मोक्ष क्षेत्र बनाते हैं।
Q5. उज्जैन यात्रा के लिए सही मार्गदर्शन कहाँ मिलेगा?
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